युवाओं को राजनीति में आने की सलाह देने वाले राहुल-गहलोत से अलग पायलट की नसीहत, बोले- पढ़ाई करो और अफसर बनो

नया सत्याग्रह, जयपुर। कांग्रेस में युवाओं को राजनीति में लाने और उन्हें राजनीतिक भागीदारी के लिए प्रेरित करने की बहस के बीच राजस्थान से एक अलग संदेश सामने आया है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मंगलवार को बाड़मेर में विद्यार्थियों से संवाद के दौरान एक छात्र से कहा कि राजनीति में नहीं आना, पढ़ाई करके अफसर बनना। पायलट की यह बात अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। पायलट मंगलवार को बाड़मेर के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने वीरेंद्र धाम छात्रावास में विद्यार्थियों के साथ नाश्ता किया और उनसे बातचीत की। इसी दौरान छात्र से बातचीत में उन्होंने उसे पढ़ाई करने और अफसर बनने की सलाह दी।
पायलट की इस सलाह को कांग्रेस के भीतर युवाओं की राजनीति को लेकर दिए जा रहे दूसरे संदेशों के संदर्भ में देखा जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत युवाओं से सीधे राजनीति में आने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने नगर निकाय चुनाव में भी जेन जी को पचास फीसदी से ज्यादा टिकट दिए जाने की भी पैरवी की है. राहुल गांधी भी लगातार छात्रों और युवाओं से संवाद कर रहे हैं। वे शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। कांग्रेस की राजनीति में युवाओं को आगे लाने की बात राहुल गांधी के राजनीतिक एजेंडे का भी हिस्सा रही है।
पायलट की अपनी राजनीति से कितना अलग है यह संदेश?
सचिन पायलट की बाड़मेर में कही गई यह बात इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनका अपना राजनीतिक सफर युवावस्था में ही शुरू हुआ था। पायलट 26 साल की उम्र में 2004 में दौसा से लोकसभा सांसद चुने गए थे। इसके बाद वे केंद्र सरकार में मंत्री भी बने। यानी जिस उम्र में आज वे विद्यार्थियों को पढ़ाई करके अफसर बनने की सलाह दे रहे हैं, उसी उम्र में वे खुद सक्रिय राजनीति में प्रवेश कर चुके थे और संसद का हिस्सा बन गए थे। यही वजह है कि पायलट की इस सलाह को उनके अपने राजनीतिक जीवन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि युवा राजनीति में नहीं आएंगे, तो राजनीति में नई पीढ़ी और नई सोच कैसे आएगी ? हालांकि यह भी संभव है कि पायलट का संदेश किसी छात्र को तत्काल करियर लक्ष्य के तौर पर पढ़ाई और प्रशासनिक सेवा के लिए प्रेरित करने का रहा हो।
दरअसल, बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और सरकारी नौकरी को सुरक्षित करियर मानते हैं। ऐसे में पायलट की बात को युवाओं के सामने उपलब्ध करियर विकल्पों के संदर्भ में भी देखा जा सकता है। लेकिन राजनीतिक स्तर पर सवाल फिर भी कायम है कि जब राहुल गांधी और अशोक गहलोत युवाओं से राजनीति में आने की अपील कर रहे हैं तब सचिन पायलट का राजनीति में नहीं आना, पढ़ाई करके अफसर बनना वाला संदेश क्या कांग्रेस के भीतर युवा राजनीति को लेकर अलग-अलग सोच को सामने नहीं लाता ? बाड़मेर में पायलट की कही गई यह एक लाइन इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि यह केवल एक छात्र को दी गई सलाह नहीं, बल्कि एक ऐसे नेता की बात है जिसने खुद युवावस्था में राजनीति को अपना करियर चुना था।



