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जंतर-मंतर पर बगैर वर्दी लाठी भांजने वाले वीडियो वायरल, क्या भीड़ के आकलन और इसे कंट्रोल करने में हुई भारी चूक?

संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद बल प्रयोग के नियम और सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों की तैनाती पर सवाल उठे हैं। पूर्व अधिकारियों ने कहा कि लाठीचार्ज तय एसओपी और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के अनुसार ही होना चाहिए।

नई दिल्ली: संसद मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठियां भांजी और आंसू गैस के गोले छोड़े। वायरल विडियो में कुछ प्रदर्शनकारी पथराव करते दिखे तो पुलिसकर्मी बल प्रयोग करने की सीमा का उल्लंघन करते दिखी। कुछ पुलिस वाले सादी वर्दी में लाठी भांज रहे हैं, जिसे लेकर बहस छिड़ी हुई है। आखिर पुलिस से कहां चूक हुई? क्या पुलिसकर्मी सादी वर्दी में लाठी चार्ज कर सकते हैं? आखिर कब बल प्रयोग जरूरी होता है? पुलिस का दावा है कि महिला प्रदर्शनकारियों को ध्यान में रखते हुए फोर्स की तैनाती की थी।

पुलिस अफसरों ने माना कि इतनी तादाद में भीड़ जुटने का अनुमान नहीं था। कई राजनीतिक पार्टियों के अचानक सपोर्ट में आने और स्कूल-कॉलेज के स्टूडेंट्स के पहुंचने से संख्या बढ़ गई। दलों से जुड़े नेता मंझे हुए थे, जिन्होंने बैरिकेड तोड़ने शुरू कर दिए। युवा भी उत्साहित हो गए और आगे बढ़ने लगे। पथराव किया गया। कानून-व्यवस्था बिगड़ने से बचाने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े।

बल प्रयोग के लिए पुलिस की तय प्रक्रिया क्या है?

  • एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा कि बल प्रयोग करने का एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) होता है।
  • पुलिस सबसे पहले प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें शांतिपूर्वक हटने या पहले से तय शर्तों का पालन करने के लिए कहती है।
  • लाउडस्पीकर से चेतावनी देनी होती है। अगर चेतावनी के बाद भी भीड़ नहीं हटती या हिंसक हो जाती है तो न्यूनतम बल का प्रयोग कर सकते हैं।
  • हालात के मुताबिक पहले पानी की बौछार, फिर आंसू गैस और हालात बिगड़ने पर न्यूनतम लाठीचार्ज का विकल्प है, जो कमर से नीचे हो।
  • मकसद भीड़ को तितर-बितर करना होता है, ना कि बुरी तरह पीटना। जब जीवन या गंभीर चोट का खतरा हो तो सेल्फ डिफेंस के लिए फायरिंग करने का विकल्प होता है।

प्रदर्शनकारी सेल्फ डिफेंस के अधिकार का कर सकता है इस्तेमाल

एक पूर्व पुलिस अफसर का कहना है कि इतने बड़े प्रदर्शन के दौरान सादी वर्दी में तैनात करना या खुद ड्यूटी करते हुए लाठियां भांजना गैरकानूनी है। ऐसा पुलिस वाला लाठी चार्ज करता है तो प्रदर्शनकारी सेल्फ डिफेंस के अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है। वह ये कह सकता है कि वह नहीं जानता था कि लाठी चार्ज करने वाला पुलिस वाला है, इसलिए सेल्फ डिफेंस के अधिकार का प्रयोग करते हुए प्रतिकार किया। बगैर सीनियर अफसरों के आदेश के भी लाठीचार्ज करना गैरकानूनी है। बगैर वर्दी ड्यूटी करने वाले पुलिसवाले को भी अपने साथ किसी तरह की अनहोनी होने पर कई बेनिफिट से वंचित होना पड़ सकता है।

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