जंतर मंतर के आस-पास ‘कई जंतर मंतर’, बोल रही हैं दीवारें- Ground Report

दिल्ली के अंदर आमतौर पर दीवारों पर लिखे नारे यूनिवर्सिटी जैसी जगहों पर दिखते हैं. लेकिन अगर आप जनपथ रोड से टॉल्स्टॉय मार्ग लेकर जंतर-मंतर की तरफ़ जाएंगे, तो दीवारें बोलती हुई नज़र आएंगी.
खाने के पैकेट बांटते हाथ… फर्स्ट-एड किट लिए तैनात कंधे… सड़क पर गिरा कचरा समेटती झाड़ू… प्लास्टिक और जूट के हाथ-पंखों से हजारों चेहरों का पसीना पोंछने की जद्दोजहद… ये नज़ारे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हाल के वर्षों में हुए सबसे बड़े विरोध-प्रदर्शन के हैं. ये तस्वीरें हैं नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी के धरना-स्थल की. ये हाल है जंतर-मंतर का. जी हां, उसी जंतर मंतर का, जहां छात्रों का ये प्रोटेस्ट तक़रीबन एक महीने से चल रहा है.

प्रोटेस्ट साइट पर फैले कचरे को साफ करती छात्रा
जंतर मंतर पर पिछले एक महीने में मंच पर 21 दिन तक सोनम वांगचुक का अनशन चला, उसके बाद उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया. हालाकि, सोनम वांगचुक ने अनशन के 27वें दिन दो केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में अपना अनशन तोड़ दिया है. देश के कद्दावर नेताओं हस्तियों का आना-जाना रहा. वांगचुक के अस्पताल जाने के बाद भी भी ये सिलसिला रुका नहीं है.

सीजेपी के मंच के सामने जुटी भीड़ और हवा में फहराता तिरंगा. यह वही मंच है, जिस पर बड़े सियासी लीडर्स आकर संबोधन देते हैं.
जनसैलाब से भरा पूरा इलाक़ा
जंतर मंतर के आसपास के कई किलोमीटर के दायरे में छोटे-छोटे ऐसे कई जंतर-मंतर अब दिखने लगे हैं. वहां का हर नुक्कड़, हर दीवार, हर चौराहा अब आंदोलन का हिस्सा है. जहां छात्रों के अलग-अलग समूह आंदोलन की मशाल में अपने हिस्से का ईंधन डाल रहे हैं. इसके सबके तरीक़े भी जुदा हैं, कोई नारों से आग लगा रहा है, कोई नुक्कड़ नाटक से आईना दिखा रहा है. कोई क्रांति के गीत गाकर हौसला बढ़ा रहा है, तो कोई दीवारों को कैनवास बनाकर अपनी पीड़ा और मांगों को रंग दे रहा है. और इन सबके बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अकेले, सिर्फ एक पोस्टर और बुलंद हौसले के साथ, पूरी व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे हैं.
